प्रधानाचार्य

सुनील कुमार कुशवाहा

जिस प्रकार पृथ्वी के गर्भ में अथाह व्याकुल उर्ज़ा व अमुल्य धन सम्पदा विघमान है उसी तरह प्रत्येक बाल शरीर में भी अपरमित उर्ज़ा और शक्ति पूर्ण आतंरिक ज्ञान मांसपिंड के अंत पटल पर शुक्ष्म रूप से ज्ञानमयकोश, मनोमयकोश, प्राणमयकोश और आनंदमयकोश में तैरता रहता है और जिस प्रकार वाह्य स्थल पर अनेकानेक परिवर्तन के बाद भी पृथ्वी अपनी अपरिवर्तित गति से अविरक चलतीं रहीं है सौभाग्या से कुछ ऐस सुअवसर हमे भी प्राप्त हुआ है कि सेवा के रूप मै हम अपने संकल्प से सुरसरिता के सुरमय तट पर स्थित इस विद्यालय में अध्यनशील प्रत्येक विद्यार्थी को विद्या के आलोक में उनके कमियों और अज्ञानता को ज्ञान के बज्रभेदी प्रायस से हटा कर, बलबुद्धि को शाश्वत ज्ञानमय वर्शा ओत प्रोत कर सकें जिससे इस वद्यालय में पढ़ने वाले सभी बच्चे हर हाल मै सफ़ल होँ साथ हीं साथ हमारे नेतृत्व क सही प्रयास रहा है कि हमारे विद्यार्थी कठोर अनुशाशन में तपकर आत्मसंयमी एव परिश्रमी बने और भविष्य में समाज और देश के सच्चरित्र व जिम्मेदार नागरिक बने।