विद्यार्थियों की प्रतिज्ञा

भारत मेरा देश है। सब भारतवासी मेरे भाई-बहन हैँ। मैँ अपने देश से प्रेम करता हूँ। इसकी समृद्ध एवं विविध संस्कृति पर मुझे गर्व है। मैँ सदा इसका सुयोग्य अधिकारी बनने का प्रयत्न करता रहूगाँ। मैँ अपने माता-पिता, शिक्षकोँ एवं गुरुजनोँ का सम्मान करुगाँ और प्रत्येक के साथ विनीत रहूगाँ। मैँ अपने देश और देशवासियोँ के प्रति सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करता हूँ। इनके कल्याण एवं समृद्धि मेँ ही मेरा सुख निहित है।

आदर्श विद्यार्थी बनने के लिए युक्तियाँ

  • कक्षा में ध्यान से सुनिए हमेशा जागरूक रहें तथा कक्षा मे झपकी एवं सोने से बचे।
  • कक्षा में प्रश्न पूछे तथा पूछे गये प्रश्नो क जवाब देँ।
  • कक्षा में पढ़ाये गये पाठ है पुनर्भयास करें और कठिनाइयों को दुर करें।
  • किसी भी पाठ एवं गृहकार्य कि उपेक्षा न करें।
  • किसी पाठ को याद करने के लिये रात को याद करे सुबह पुनः उसे दोहराये।
  • सप्ताह के अन्त में सप्ताहभर कि पढ़े को दोहराये।
  • घर में पढाई के लिये स्वयं एक समय सारिणी बनावे।
  • समय के महत्व को पहचाने, परीक्षा तक प्रतीक्षा न करें, नियमित एव ईमानदारी पुर्वक किया गया कार्य सफलता कि कूंजी है।

स्वास्थ बिन्दु

प्रतिदिन सुबह सुर्योदय से पहले जगकर नियमित रूप से योग, व्यायाम, प्राणायाम, कपालभांति, शीर्षासन आदि विभिन्न प्रकार के आसन करके अपने मन मस्तिश्क की विकृतियों को दुर कर के शरीर को स्वस्थ बनाये। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ बुद्धि का निवास होता है।

सदाचार के रत्न

  • समय पर प्रतिदिन विद्यालय जाएं।
  • स्वयं के साथ साथ किताबों और कपड़ो को भी स्वच्छ रखें।
  • किताब कापियां पर भुरे क़ाग़ज कि ज़िल्द चढाकर नामांकित करें।
  • दिवार, बेंच, डेस्क, तथा श्यामपट पर न लिखे।
  • रद्दी कागज तथा अन्य वस्तुओ से प्राप्त गन्दगी को कूड़ादान फेंकें।
  • बरामदों तथा कक्षाओं में ना खेलें।
  • बड़ो से बातचीत में हस्तक्षेप न करें।
  • अपने से बड़ों को पहले जाने देँ।
  • किसी से कुछ मांगते समय कृपया शब्द प्रयोग करें।
  • कक्षाओं की बगल से गुजरते वक्त कक्षाओं मे कदापि न झाँके।
  • शिष्टाचार के सभी आदर्शो के पालन मे प्राप्त शिक्षक शिक्षिकाओं को प्रणाम करें।
  • समय की पाबंदी और समय क उपयोग विद्यार्थी जीवन का सबसे उत्तम कार्य है।
  • विद्यालय का फीस समय से ज़मा करना नैतिक कर्तव्य होना चहिये।

विद्यार्थियों से....

  • माता पिता के आज्ञा का पालन करें।
  • अपनी जिम्मेदारियों से कभी भी मुँह न मोड़े।
  • सफलता का मूल मंत्र है "मेहनत" इस तथ्य को दिल से स्वीकार करें।
  • सिमित साधनो में ही बेहतर परिणाम देने कि कोशिश करनी चाहिए। बड़े लक्ष्य को पाने के लिए छोटे छोटे लक्ष्यों को बेहतर ढंग से आयाम देने के लिये भी योजना बनाकर कार्य करना चाहिए। ऐसा करने से न तो कार्य बोझ करना सताएगा और परेशानियों की स्वतः ही धीरे धीरे दूर होती चली जायेगी। सफल बनने के लिए सेल्फ मोटिवेटेड होना चाहिए। समय समय पर अपने गुणों - अवगुणों का मूल्यांकन तथा सफलता असफलता की समीक्षा कर अपनी वास्तविक योग्यता को पहचान कर उसे विकसित करने के लिये योजनाबद्ध कार्यक्रम का निर्माण तथा इस निर्णिम कार्य कार्य को क्रियान्वित करने के लिये उचित शैक्षणिक संस्थान का चयन करें। सफलता आपकी कदम निश्चित चूमेगी।

अभिभावकों के लिए आवश्यक निर्देश

  • विद्यार्थी के स्कूल से घर वापिस आने पर उनकी स्कूल डायरी चेक करें तथा अध्यापको द्वारा दिए गए निर्देशो को भली भांति पढ़ लें।
  • गृहकार्य पूरा करने में अपना पूर्ण सहयोग दें। यदि छात्र/छात्रा अस्वस्थ है तो उसकी लिखित सूचना विद्यालय को दें।
  • यदि कोई छात्र/छात्रा विद्यालय अवकाश के बाद आधे घंटे तक अपने घर नहीं पहुँचता /पहुँचती है तो तुरंत विद्यालय को उसकी सूचना दें जिससे उचित कार्यवाही की जा सके।
  • अपने बच्चो को हमेशा स्वच्छ और साफ स्कूल वेषभूसा (यूनिफार्म) में नियत समय पर विद्यालय भेजें।
  • जब कक्षाएँ चल रही हो, तब अभिभावक कक्षाओं में न जाये तथा प्रधानाचार्य / प्रधानाचार्या से संपर्क करें।
  • आप अपने बच्चे या बच्चियों को भोजन का डिब्बा (लंच बॉक्स) दें तो उस पर उनके नाम का चिट अवश्य लगा दें।
  • यदि विद्यार्थी एक सप्ताह तक बिना किसी सूचना के विद्यालय नहीं आता है तो उसका नाम काट दिया जायेगा। नाम काटे जाने की स्थिति में विद्यार्थी को पुनः प्रवेश की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

परिधान

छात्रों के लिये ---- स्लेटीग्रे पैंट, सफेद शर्ट, टाई बेल्ट, कालेजुते, सफेद मोजे, शीत काल में स्लेटीग्रे स्वेटर छात्राओं के लिये -- कक्षा एल0 के0 जी0 से कक्षा ८ तक की छात्राओं के लिये -- स्लेटीग्रे स्कर्ट, सफेदटफ, टाई, बैज, कालेजुते, सफेद मोजे कक्षा ९ से १२ तक की छात्राओं के लिये -- सफेद सलवार, स्लेटीग्रे समीज, कालेजुते, सफेद मोजे।