विद्यालय के उद्द्येश्य

सम्राट अशोक इंटर कॉलेज के मूल उद्येश्य

सम्राट अशोक इंटर कॉलेज के मूल उद्येश्य उत्कृष्ठ शिक्षा द्वारा विद्यार्थी का संतुलित मानसिक शारीरिक नैतिक अनुशासन संस्कार चारित्रिक विकास कर उन्हे जीवन के योग्य बनना.

  • जीवन लक्ष्य
  • गुणवत्ता शिक्षा
  • मूल्य शिक्षा का उद्देश्य बनकर विद्यार्थी का चरित्र निर्माण करना
  • विद्यार्थी के ठोस ज्ञानाअर्जन और उचित मार्ग दर्शन देना तथा उनके साथ चलना ताकि सत्य मार्ग पर चल सके
  • विद्यार्थी को ऐसा नागरिक बनाना जो सभी क्षेत्र मे दक्ष हो
  • विद्यार्थियों मे मेह्नत बनने का सँस्कार डालना जिससें वह समाज पर आमिट छाप छोडना मे समर्थ हो
  • सभी कार्य क्षेत्रो मे जीवन की श्रेष्ठता को महत्व देना
  • नेतृत्व गुण को बढ़ावा देना जिससे आगे चलकर कई सेवाओ मे कर्मठ सफल एव वचन बाध्य बने

गरीब बच्चो के हित की व्यवस्था करना उन्हे बल प्रदान करना ताकि वे अपने जीवन मे तथा अपने आसपास के वातावरण को बदलने मे सक्ष्म होकर अपने माता पिता के सपने को साकार करे विद्यार्थियों के उन आंतरिक दोषो को दुर करना जो उनके विकाश मे बाधक है उन बाधाओ पर विजय प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों मे शारीरिक मानसिक संवेदनात्मक और आध्यात्मिक निर्माण के लिए उचित संस्कार डालना जिससे उनका व्यक्तित्व संतुलित हो

जीवन की विषमताओं का सामना कर सके , विभिन्न घटनाओ परिस्थितियों और व्यक्तियों कि पुकार क प्रत्युत्तर देने में सक्षम बने। विद्यार्थी को आत्मविश्वासी और प्रवीण बनाने के लिये काम करना है, उनकी व्यक्तिगत देख भाल करना और उनके मार्गदर्शन देना, ताकि वे विभिन्न चिनौतियो क सामना केर सकें, जो उनके अस्तित्व को खतरे में डालती है।

विद्यार्थी मे बौद्धिक जिज्ञासा, कडी मेहनत करने की संस्कृती, अपनी शिक्षा दीक्षा लेने कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने कि छमता और पोषण करना, ताकि सजग रहकर अन्य क्षेत्रों मे जीवन प्रयत्न विकाश के लिये खुला रहे।

  • अपने देश के विभिन्न मजहब है।
  • "अनेकता में एकता " हमारे राष्ट्र की बुनियादी विषेशता है , इस विषेशता को बरकरार रखने के लिये हमे विद्यार्थी के मन में आपसी भाईचारा, सहिष्णुता एकता और राष्ट्र के प्रति वफादार रहने की भावना को विकसित करना।

  • संस्कृति विरासत के साथ -
  • विद्यार्थी अपनी संस्कृति धरोहर के प्रति गौरव और आजादी का अनुभव करें तथा अपनी अनूठी अस्मिता बरकारार रखते हुये अन्य संस्कृतीयो का भी सम्मान करें। विद्यार्थी कि पैतृक सम्पति, सांस्कृतिक घरोहर को मन्यता देते हुये भारतीय सांस्कृति को बढ़ावा देना ताकि वे अपनी संस्कृति के प्रति गौरव और आज़ादी का अनुभव करें तथा अपनी अनूठी अस्मिता बरकारार रखते हुए सभी संस्कृति कि अच्छाइयो को स्वीकार करें।

    विद्यार्थियों मे ज्ञान और भलाई और प्रेम का स्रोत स्वीकार करते हुए निरन्तर विद्यालय में धार्मिक-निरन्तर विद्यालय में धार्मिक- नैतिक शिक्षा अनुशाशन संस्कार का वातावरण तैयार करना जहाँ विद्यार्थी ईश्वरीय जीवन और उनकी आस्था से ओत प्रोत हो सकें।